ध्यान करने से होता क्‍या है?

यह क्रिया आपके और आपके शरीर, आपके और आपके मन के बीच एक दूरी बनाती है। आप जीवन में जूझ इसलिए रहे हैं, क्योंकि आपने इन सीमित रूपों के साथ अपनी पहचान बना ली है। ध्यान की खासियत यह है कि आप और जिसे आप अपना ‘मन’ कहते हैं, उनके बीच एक दूरी बन जाती है। आप जिस भी पीड़ा से गुजरते हैं, वह आपके दिमाग की रचना है; क्या ऐसा नहीं है? अगर आप खुद को दिमाग से दूर कर लेते हैं, क्या आपके भीतर पीड़ा हो सकती है? यहीं पीड़ा का अंत हो जाता है।

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ध्‍यान करने से क्या फायदा है?

हैलो  दोसतो ये कुछ किसी  वेबसाइट से बहुत अच्छी जानकारी प्राप्त की है

जैसे ही आप अपने अनुभवों से अपनी पहचान बना लेते हैं, जैसे ही आप अपनी पहचान किसी ऐसी चीज से बना लेते हैं जो आप नहीं हैं, आपकी समझ, आपकी बोधन-क्षमता, पूरी तरह बेकाबू हो जाती है। आप जीवन को वैसे नहीं देख सकते जैसा वो है; अपकी ग्रहण करने की क्षमता बहुत ज्यादा विकृत हो जाती है। यह शरीर जिसे अपने बाहर से इकट्ठा किया है, जैसे ही आप इसे ‘स्वयं’ के रूप में अनुभव करने लगते हैं, जैसे ही आप अपने दिमाग पर पड़े प्रभावों व संस्कारों को ‘स्वयं’ के रूप में अनुभव करने लगते हैं, आप जीवन को उस तरह से नहीं अनुभव कर सकते जैसा वह है। आप जीवन को उस तरह से अनुभव करेंगे जैसा आप के जीवित रहने के लिए जरूरी है, वैसा नहीं जैसा वह असल में है।

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